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Sunday, November 26

"पता ही नहीं चला"

ज़िन्दगी की इस आपाधापी में,
कब निकली उम्र मेरी, पता ही नहीं चला,

कंधे पर चढ़ते बच्चे कब,
कंधे तक आ गए, पता ही नहीं चला,

एक कमरे से शुरू मेरा सफर कब ,
बंगले तक आया, पता ही नहीं चला,

साइकल के पेडल मारते हांफते ते जब,
बड़ी गाड़ियों में लगे फिरने कब, पता ही नहीं चला,

हरे भरे पेड़ों से भरे जंगल थे तब,
कब हुए कंक्रीट के, पता ही नहीं चला,

कभी थे जिम्मेदारी माँ बाप की हम,
कब बच्चों के लिए हुए जिम्मेदार, पता ही नहीं चला,

एक दौर था जब दिन को भी बेखबर सो जाते थे,
कब रातों की उड़ गयी नींद, पता ही नहीं चला,

बनेगे माँ बाप सोचकर कटता नहीं था वक़्त,
कब बच्चो के बच्चे हो गए, पता ही नहीं चला,

जिन काले घने बालों पे इतराते थे हम,
रंगना शुरू कर दिया कब, पता ही नहीं चला,

दिवाली होली मिलते थे यारों, दोस्तों, रिश्तेदारों से,
कब छीन ली मोहब्बत आज दे दौर ने, पता ही नहीं चला,

दर दर भटके है नौकरी की खातिर खुद हम,
कब करने लगे सेकड़ों नौकरी हमारे यहाँ, पता ही नहीं चला,

बच्चों के लिए कमाने, बचाने में इतने मशगूल हुए हम,
कब बच्चे हमसे हुए दूर, पता ही नहीं चला,

भरा पूरा परिवार से सीना चौड़ा रखते थे हम,
कब परिवार हम दो पर सिमटा, पता ही नहीं चला।।।।।

Monday, November 6

Story for all

एक   हसीन   लडकी
राजा  के  दरबार   में
डांस   कर  रही   थी...

( राजा   बहुत   बदसुरत   था )

लडकी   ने   राजा   से   एक
सवाल   की  इजाजत  मांगी
.
राजा   ने  कहा ,
                     " चलो  पुछो ."
.
लडकी   ने   कहा ,
   "जब    हुस्न   बंट   रहा   था
      तब   आप   कहां  थे..??
.
राजा   ने   गुस्सा   नही  किया
बल्कि
मुस्कुराते   हुवे   कहा
  ~  जब   तुम   हुस्न   की
       लाइन्   में   खडी
       हुस्न    ले   रही   थी , ~
.
~    तो   में
  किस्मत  की   लाइन  में  खडा
             किस्मत  ले  रहा  था
.
          और   आज 
     तुझ  जैसीे   हुस्न   वालीयां
      मेरी  गुलाम   की   तरह
       नाच   रही   है...........
.
इसलीय  शायर  खुब  कहते  है,
.
    " हुस्न   ना   मांग
      नसीब   मांग   ए   दोस्त ,

       हुस्न   वाले   तो
      अक्सर   नसीब   वालों  के
      गुलाम   हुआ   करते   है...

      " जो   भाग्य   में   है ,
        वह   भाग   कर  आएगा,

         जो   नहीं   है ,
         वह   आकर   भी
         भाग   जाएगा....!!!!!."

यहाँ   सब   कुछ   बिकता   है ,
दोस्तों  रहना  जरा  संभाल  के,

बेचने  वाले  हवा भी बेच देते है,
      गुब्बारों   में   डाल   के,

        सच   बिकता   है ,
        झूट   बिकता   है,
       बिकती   है   हर   कहानी,

       तीनों  लोक  में  फेला  है ,
       फिर   भी   बिकता   है
       बोतल  में  पानी ,

कभी फूलों की तरह मत जीना,
जिस   दिन  खिलोगे ,
टूट  कर  बिखर्र  जाओगे ,
जीना  है  तो
पत्थर   की   तरह   जियो ;
जिस   दिन   तराशे   गए ,
" भगवान " बन  जाओगे...!!!!🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर,

अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर,

अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

गिद्ध भी कहीं चले गए, लगता है उन्होंने देख लिया,

कि इंसान हमसे अच्छा नोंचता है!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर,

क्या मस्त तलवे चाटता है इंसान!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

कोई टोपी, तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है,

मिले अगर भाव अच्छा, जज भी कुर्सी बेच देता है!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी,

जिसकी खातिर बाप किडनी बेच देता है!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

ये कलयुग है, कोई भी चीज़ नामुमकिन नहीं इसमें,

कली, फल, फूल, पेड़, पौधे सब माली बेच देता है!

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

धन से बेशक गरीब रहो, पर दिल से रहना धनवान,

अक्सर झोपड़ी पे लिखा होता है: "सुस्वागतम"

और महल वाले लिखते हैं:
"कुत्तों सॆ सावधान"

🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃🔃

🙏🏼

Saturday, November 4

हल्ला बोल

देखो! देखो तुम भी देखो
गली-गली है कैसा शोर,
चुनाव है आया,चुनाव है आया
शोर यही है चारों ओर।।
ठगते है ये। नेता जिनको,
झुके हुए  है उनकी ओर।
नजरे नहीं मिलाते थे जिनसे,
पकडें हुए है उनकी डोर।।
ढोल मजीरा बजा-बजा कर,
बोल रहे है कैसे बोल।
सडकें बनायेंगे, पानी दिलायेंगे
घर-घर हम बिजली पहुचायेंगे,
ऐसे इनके झठे वादे,
सुन-सुन कर हम हो गये बोर।।
जगह-जगह ये रैलियां निकालकर,
कर रहे हैं पैसा गोल।
देखो!कितना देश को है खाया,
हो गये है गोल मटोल।।
अब डर कैसा?कैसा अफसोस?
हर एक की तू पोल खोल,
हल्ला बोल, हल्ला बोल,
इन नताओं पर तू अब हल्ला बोल।।